Frobits
🎵 A song made on Frobits

रांची में पराई जानवी

Ravindra Kumar · 🇮🇳 India
0:000:00
Download Remix
Make your own song
Continues securely on the web
Lyrics

[female vocals] ओह

हो,

दर्

द

ये

दि

ल

का

अके

ली

हूँ

मैं,

दू

र

अपने

वतन

से

सिं

गा

पु

र

से

आई

थी

मैं,

सखी

मे

री

जा

नवी

के

सं

ग

रां

ची

की

गलि

यों

में

मु

झे,

खो

ना

था

ढे

रों

रं

ग

वो

प्

या

र

से

मु

झे

यहाँ,

खीं

च

के

अपने

शहर

ला

ई

थी

पर

यहाँ

की

खा

मो

शी

में,

तन्

हा

ई

मे

री

परछा

ई

बनी

आई

थी

अँ

धे

रे

कमरों

में

सि

मट

कर,

मैं

घु

ट

घु

ट

कर

जी

ती

हूँ

अपनों

की

इस

भी

ड़

में,

मैं

ज़हर

के

घूँ

ट

पी

ती

हूँ

मे

री

जा

नवी,

कहाँ

खो

गई

वो

पु

रा

नी

सहे

ली?

इस

घर

में

अब

मैं

हूँ,

बि

ल्

कु

ल

ही

अके

ली

कवि

ता

प्

रसा

द

का

सि

तम,

अब

बर्

दा

श्

त

नहीं

हो

ता

मे

रे

दि

ल

का

दर्

द,

कि

सी

को

एहसा

स

नहीं

हो

ता

को

ई

ले

चलो

मु

झे,

वा

पस

मे

रे

दे

श

सिं

गा

पु

र

इस

पिं

जरे

से

आज़ा

द

कर

दो,

का

ट

दो

ये

बे

ड़ि

यों

की

डो

र

अँ

धे

रे

को

ने

में

बै

ठ

कर,

मैं

घड़ि

याँ

गि

न

रही

हूँ

उसकी

क्

रू

रता

की

मैं,

हर

एक

सजा

सह

रही

हूँ

जब

वो

गु

स्

से

में

आती

है,

मुँ

ह

पे

कपड़ा

बां

ध

दे

ती

है

मे

री

आवा

ज़

को

वो,

खा

मो

शि

यों

में

ही

मा

र

दे

ती

है

मैं

कि

सी

से

न

कह

पा

ऊँ,

मन

की

अपनी

ये

बा

तें

सु

लगती

आँ

खों

में

कटती

हैं,

रां

ची

की

ये

का

ली

रा

तें

मे

री

जा

नवी,

कहाँ

खो

गई

वो

पु

रा

नी

सहे

ली?

इस

घर

में

अब

मैं

हूँ,

बि

ल्

कु

ल

ही

अके

ली

कवि

ता

प्

रसा

द

का

सि

तम,

अब

बर्

दा

श्

त

नहीं

हो

ता

मे

रे

दि

ल

का

दर्

द,

कि

सी

को

एहसा

स

नहीं

हो

ता

को

ई

ले

चलो

मु

झे,

वा

पस

मे

रे

दे

श

सिं

गा

पु

र

इस

पिं

जरे

से

आज़ा

द

कर

दो,

का

ट

दो

ये

बे

ड़ि

यों

की

डो

र

क्

या

यही

था

मे

रा

नसी

ब,

क्

या

यही

था

मे

रा

मु

कद्

दर?

जहाँ

रो

शनी

नहीं

है,

जहाँ

बस

छा

या

है

ये

मं

ज़र

मे

रा

सिं

गा

पु

र,

मे

रा

घर,

या

द

बहु

त

आता

है

ये

अजनबी

शहर

मु

झे,

हर

पल

रु

ला

ता

है

सु

न

ना

ओ

खु

दा,

मे

री

पु

का

र

ये

सु

न

ले

तू

इस

कै

द

से

मु

झे

बा

हर,

अब

तो

नि

का

ल

ले

तू

को

ई

नहीं

है

यहाँ,

जो

मे

रे

आँ

सू

पों

छ

सके

को

ई

नहीं

है

यहाँ,

जो

मु

झे

अपना

कह

सके

मैं

थक

चु

की

हूँ

इस

घु

टन

से,

मैं

मर

रही

हूँ

अं

दर

से

बस

एक

बा

र

पहुँ

चा

दे

मु

झे,

मे

रे

उस

प्

या

रे

वतन

में

मे

री

जा

नवी,

कहाँ

खो

गई

वो

पु

रा

नी

सहे

ली?

इस

घर

में

अब

मैं

हूँ,

बि

ल्

कु

ल

ही

अके

ली

कवि

ता

प्

रसा

द

का

सि

तम,

अब

बर्

दा

श्

त

नहीं

हो

ता

मे

रे

दि

ल

का

दर्

द,

कि

सी

को

एहसा

स

नहीं

हो

ता

को

ई

ले

चलो

मु

झे,

वा

पस

मे

रे

दे

श

सिं

गा

पु

र

इस

पिं

जरे

से

आज़ा

द

कर

दो,

का

ट

दो

ये

बे

ड़ि

यों

की

डो

र

वा

पस

मे

रे

दे

श

सिं

गा

पु

र...

ओए...

अब

तो

आज़ा

द

कर

दो,

मे

री

ख़ा

मो

शी

को

सु

न

लो

को

ई

ले

चलो

मु

झे...

घर

ले

चलो

मु

झे

सिं

गा

पु

र...

मे

री

जा

नवी...

More songs by Ravindra Listen to songs created by others
FROBITS